
जरूरी नहीं कि आंदोलन में हम 4 लाख के प्रतिनिधित्व का दम भरने वाले अभियान में सर खपाएं.. जरूरी ये भी नहीं कौन हमारे साथ चल रहे और कौन नहीं.. ट्रेड यूनियन स्ट्रगल में ये सब आम बातें हैं..हर कोई सक्सेस लवर होता है यहाँ.. लाभ और सुविधाओं को लेकर मनोगतिक आवेग प्रचंड होता है..इसलिए मैंने यहाँ अपनी इस चिंता को साझा किया और मांग के मुद्दे को चिन्हित करने की कोशिश किया..!
आप तमाम नेतृत्वकारी साथियों से ये आश्वस्ति अपेक्षित है कि हमने इससे पूर्व जिन चार माँगों को आगामी आंदोलन का हिस्सा बनाने की अपील की थी उसे लेकर आपलोगों के द्वारा किये गए सांगठनिक पहल कब अंजाम पा सकेंगे.. क्योंकि माँग में राज्य कर्मी के रूप में सहायक शिक्षक का दर्ज़ा..समान काम समान वेतन ये सारे वही उलझानेवाली माँगें हैं जो सरकार भी चाहती है कि यही माँगा जाए..!
शिक्षक हैं हम..याचक नहीं..!!
ये अवगत हो लें कि याचक की भाँति उठाए जानेवाले माँगों में सरकारें कभी नहीं घिरती..वह कृपा बरसाने वाली अंदाज़ अपना लेती है..
वह जनता के बीच हमपर अहसान जताने के अंदाज़ में होली, दशहरा, दिवाली को हमारी मजदूरी देने को आदी हो चुकी है..उसे (सरकार को) घेरने के लिए उसकी राजनीतिक विफलता, विधायी निर्लज़्ज़ता तथा कार्यपालक निष्क्रियता को सरेआम नँगा कर लोगों के बीच चेतना भरनी होगी..तभी सरकार कायल होगी हमारे आंदोलन का..!! बिहार की प्रारंभिक शिक्षा में सहायक शिक्षक के पद को विलोपित/मृत घोषित करना और आर.टी.ई. के प्रावधानों के अनुसार सहायक शिक्षकों के नए पद सृजित न करना ये बिहार सरकार की राजनीतिक विफलता और विधायी निर्लज़्ज़ता है तथा सहायक शिक्षकों के रिक्त पदों पर पात्र नियोजित शिक्षकों को समायोजित न करना इस प्रदेश के नौकरशाहों की कार्यपालक निष्क्रियता है..!
आओ..सब मिलकर उसके मर्म पर चोट करने को उद्दत हो जाओ..!
आप तमाम नेतृत्वकारी साथियों से ये आश्वस्ति अपेक्षित है कि हमने इससे पूर्व जिन चार माँगों को आगामी आंदोलन का हिस्सा बनाने की अपील की थी उसे लेकर आपलोगों के द्वारा किये गए सांगठनिक पहल कब अंजाम पा सकेंगे.. क्योंकि माँग में राज्य कर्मी के रूप में सहायक शिक्षक का दर्ज़ा..समान काम समान वेतन ये सारे वही उलझानेवाली माँगें हैं जो सरकार भी चाहती है कि यही माँगा जाए..!
शिक्षक हैं हम..याचक नहीं..!!
ये अवगत हो लें कि याचक की भाँति उठाए जानेवाले माँगों में सरकारें कभी नहीं घिरती..वह कृपा बरसाने वाली अंदाज़ अपना लेती है..
वह जनता के बीच हमपर अहसान जताने के अंदाज़ में होली, दशहरा, दिवाली को हमारी मजदूरी देने को आदी हो चुकी है..उसे (सरकार को) घेरने के लिए उसकी राजनीतिक विफलता, विधायी निर्लज़्ज़ता तथा कार्यपालक निष्क्रियता को सरेआम नँगा कर लोगों के बीच चेतना भरनी होगी..तभी सरकार कायल होगी हमारे आंदोलन का..!! बिहार की प्रारंभिक शिक्षा में सहायक शिक्षक के पद को विलोपित/मृत घोषित करना और आर.टी.ई. के प्रावधानों के अनुसार सहायक शिक्षकों के नए पद सृजित न करना ये बिहार सरकार की राजनीतिक विफलता और विधायी निर्लज़्ज़ता है तथा सहायक शिक्षकों के रिक्त पदों पर पात्र नियोजित शिक्षकों को समायोजित न करना इस प्रदेश के नौकरशाहों की कार्यपालक निष्क्रियता है..!
आओ..सब मिलकर उसके मर्म पर चोट करने को उद्दत हो जाओ..!
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